DNA Analysis: Understand the truth of every trick of China from Buddhist monks | DNA Analysis: बौद्ध भिक्षुओं से समझिए चीन की हर चाल का सच

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नई दिल्ली: हम आपको चीन के खिलाफ एक और गवाही के बारे में बताएंगे. एक जमाने में चीन की ज्यादातर आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती थी. लेकिन धीरे-धीरे चीन से बौद्ध धर्म को मिटाने की शुरुआत हुई और इसके लिए जो तर्क दिए गए वो सुनकर आप हैरान रह जाएंगे.

8वीं शताब्दी में चीन के राजाओं ने बौद्ध धर्म को एक विदेशी धर्म बताना शुरू कर दिया और तर्क दिया गया कि बौद्ध धर्म में दी गई शिक्षा चीन की संस्कृति से मेल नहीं खाती. इन तर्कों के आधार पर चीन में बौद्ध धर्म मानने वालों पर अत्याचार का सिलसिला शुरू हो गया. बौद्ध धर्म के करीब 40 हजार मंदिरों को नष्ट कर दिया गया और करीब 4 लाख बौद्ध भिक्षुओं पर अत्याचार किए गए.

धीरे-धीरे चीन को एक ऐसे देश में बदल दिया गया जिसकी ज्यादातर आबादी नास्तिक है. यानी ये लोग किसी धर्म या ईश्वर को नहीं मानते. ये सब चीन में साम्राज्यवाद और वामपंथ के विस्तार के साथ शुरू हुआ. 1950 तक चीन के पड़ोस में एक ऐसा देश हुआ करता था जिसकी अधिकांश जनता बौद्ध धर्म को मानती थी. और आज भी मानती है. ये देश था तिब्बत. लेकिन चीन तिब्बत पर कब्जा करना चाहता था और इसके लिए चीन ने भोले-भाले तिब्बतियों को पहले विकास का लालच दिया और फिर सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के नाम पर तिब्बत पर कब्जा कर लिया. 1959 में तिब्बत के सबसे बड़े धर्मगुरू 14वें दलाई लामा को भारत में शरण लेनी पड़ी.

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आज भारत में बौद्ध धर्म को मानने वाले करीब 85 लाख लोग रहते हैं और इनमें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो तिब्बत से भागकर भारत आए थे. ये लोग चाहते हैं कि भारत तिब्बत को मान्यता दे और चीन के साथ लगी अपनी सीमा को भारत-चीन सीमा नहीं बल्कि भारत-तिब्बत सीमा कहकर बुलाए. इन लोगों का साफ तौर पर कहना है कि तिब्बत एक देश है जिस पर चीन ने कब्जा किया हुआ है. इसलिए भारत और चीन के बीच कोई सीमा है ही नहीं. जो सीमा है वो भारत और तिब्बत के बीच है.

ज़ी न्यूज़ की टीम ने लेह के एक मशहूर बौद्ध मंदिर में रहने वाले कुछ बौद्ध भिक्षुओं से बात की. इन भिक्षुओं ने चीन को लेकर जो कहा वो आपको सुनना चाहिए. ये बातचीत सुनकर आप चीन की हर चाल को बहुत अच्छे से समझ जाएंगे.

भारत को तिब्बत को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता दे देनी चाहिए. ताईवान को भी एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देनी चाहिए और हॉन्गकॉन्ग को भी खुला समर्थन देना चाहिए. इसे आप TTH फॉर्मूला भी कह सकते हैं.



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