Manjha cut 24-year-old Arjun face, barely survives former cricketer’s son |पतंग की डोर में फंसी पूर्व क्रिकेटर मनिंदर सिंह के बेटे की जिंदगी

0
335

नई दिल्ली: चाइनीज मांझे (Chinese Manjha) को बैन करने की तमाम कोशिशों के बाद भी मांझे से होने वाले हादसे थमे नहीं हैं. यही वजह रही कि 15 अगस्त को लोगों ने जमकर पतंगबाजी की. मांझे से कटकर घाव लेकर अस्पताल पहुंचने वालों की भीड़ लग गई. पतंग की डोर की वजह से पूर्व क्रिकेटर मनिंदर सिंह के बेटे अर्जुन की जिंदगी भी दांव पर लग गई थी. मांझे से कटने के बाद 24 साल के अर्जुन ठीक होकर लौट आए, लेकिन ये हादसा उनके जेहन से कभी नहीं मिट सकता.

दरअसल साइकिल पर जा रहे अर्जुन के चेहरे से उलझे पतंग के एक मांझे ने पूरा होंठ काट दिया. इतना खून बहा कि हेलमेट से लेकर जूते तक खून से सन गए. इस हादसे से उनकी जिंदगी तक दांव पर लग गई. अर्जुन रोजाना 50 से 60 किलोमीटर साइकिल चला लेते हैं. एक्सीडेंट से बचने के लिए हमेशा हेड गेयर यानी साइकिल के हेलमेट और कोहनियों और घुटनों के लिए पैड्स का इस्तेमाल भी करते हैं, लेकिन ये सब बेकार साबित हुआ और 15 अगस्त की शाम जब दिल्ली पतंगबाजी कर रही थी, एक मांझे की वजह से अर्जुन का होंठ बुरी तरह से कट गया. धार इतनी तेज थी कि खून पानी की तरह बहने लगा, अर्जुन बेहोशी की हालत में आ चुके थे, एक कार सवार ने इन्हें सड़क पर पड़े देखा लेकिन गाड़ी गंदी होने के डर से वहीं छोड़ कर चल दिया.  

पीछे से आ रही दूसरी कार में एक युवा दंपति ने इन्हें कार में बैठाया. अर्जुन की साइकिल बड़ी थी, जिसे एक दूसरे कार सवार की डिक्की में रखकर उससे गुजारिश की कि साइकिल अस्पताल में छोड़ दे. लेकिन वो आदमी अर्जुन की साइकिल लेकर गायब हो गया और आज तक उसका कोई पता नहीं है. लेकिन उस वक्त जिंदगी और मौत से जूझ रहे अर्जुन को बचाना बड़ी चुनौती थी.

गाजियाबाद के वैशाली में बने मैक्स अस्पताल में अर्जुन की सर्जरी हुई. तीन दिन अस्पताल में रहने के बाद अर्जुन घर लौट आए. लेकिन घाव भरने और पूरी तरह नॉर्मल होने में इन्हें अभी 6 महीने लगेंगे. सिर्फ उस एक अस्पताल के डॉक्टरों ने 15 अगस्त के दिन मांझे से कटने की वजह से 5 और लोगों के आपरेशन किए थे.

ये भी पढ़ें: कोरोना वायरस ने किया और बुरा हाल! नए मामलों में नंबर एक हुआ भारत

2017 में दिल्ली सरकार ने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने चाइनीज मांझे पर रोक लगा दी थी. दरअसल भारत में सूत वाले धागे से पतंगें उड़ाई जाती थी लेकिन चाइनीज मांझे में कांच, प्लास्टिक, नाइलोन और दूसरी धातुओं को मिलाया जाता है जो किसी की जान भी ले सकता है. लेकिन तमाम पाबंदियों के बावजूद ये मांझा दिल्ली एनसीआर में आसानी से मिल जाता है. दिल्ली पुलिस हर साल मांझे के खिलाफ छापामार अभियान चलाने के दावे तो करती है लेकिन अस्पताल में हर साल मांझे से जान गंवाने वालों और घायल होने वालों के आने का सिलसिला बता रहा है कि बैन केवल कागजों पर ही लग सका है.

 



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here