private company terminated many employees due to lockdown in barmer | बाड़मेर: निजी कंपनियां नहीं मान रहीं PM की बात, बिना नोटिस निकालने का सिलसिला जारी

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भूपेश आचार्य, बाड़मेर: लॉकडाउन के चलते पीएम मोदी ने अपील की थी कि किसी भी कंपनी की ओर से अपने कर्मचारी को न निकाला जाए. इस बीच बाड़मेर जिले के कई लोगों को कंपनियों ने एक मेल कर टर्मिनेट कर दिया. अब उनके सामने इस लॉकडाउन में रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

कर्मचारियों का आरोप है कि वह एक निजी कंपनी में काम करते थे, जहां से उन्हें बिना नोटिस दिए ही निकाल दिया गया है. इस पर उन्होंने ट्वीट कर पीएम और सीएम से शिकायत की है कि उन्हें वापस नौकरी पर रखा जाए. 

वैश्विक महामारी कोविड-19 से किए गए लॉकडाउन से बाड़मेर जिले के कई युवाओं की रोजी-रोटी पर भी संकट उत्पन्न हो गया है. हालांकि, प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन करने के साथ ही सभी व्यापारियों और कंपनी मालिकों से अपील की थी कि कोई भी इस मुश्किल हालात में अपने कर्मचारी को नौकरी से न निकालें, लेकिन प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद भी निजी कंपनियों का कर्मचारी को निकालने का सिलसिला जारी है. ये थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. 

ऐसा ही एक मामला बाड़मेर में सामने आया है, जहां पर एक निजी कंपनी में काम करने वाले कई कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है. कर्मचारियों की मानें तो पूरे भारत में मिलाकर करीब 7 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है. इसके लिए उन्होंने अपनी पीड़ा प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री गहलोत तक ट्वीट कर बताई है. 

निजी कंपनी में काम करने वाले ललित खत्री ने बताया कि वो उस कंपनी में पिछले 10 महीने से काम कर रहा है, लेकिन कंपनी ने अचानक ही एक छोटा सा मेल देकर टर्मिनेट कर दिया है. अब ऐसे में उन्हें 6 महीने तक कोई रोजगार नहीं मिलेगा. इसके चलते उन्होंने अपनी बात पीएम और सीएम के समक्ष ट्वीट के जरिए रखी है.इसी तरह कंपनी में काम करने वाले प्रेम सिंह का कहना है कि वे कंपनी में करीब 6 महीनों से काम कर रहा है लेकिन कंपनी ने उन्हें भी निकाल दिया है. उन्होंने पीएम और सीएम से अपील की है कि उन्हें फिर से नौकरी पर रखा जाए.

पीड़ितों का कहना है कि इस कोविड-19 के संकट के बाद करीबन 6 महीने तक तो उन्हें कहीं रोजगार भी नहीं मिलेगा. ऐसे में पीएम और सीएम से उन्होंने अपील किया है कि इस पूरे मामले को संज्ञान में लें, ताकि उन्हें फिर से नौकरी पर रखा जाए. 

 

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